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जमशेदपुर में कोंडागांव कॉलेज के कोर्राम ने नई शिक्षा नीति पर पेश किया शोध पत्र
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भास्कर न्यूज | जगदलपुर
बस्तर विश्वविद्यालय के शोध केन्द्र शासकीय गुंडाधूर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कोंडागांव के समाजशास्त्र विभाग के शोधार्थी नीलूराम कोर्राम ने राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में बस्तर का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने जनजातीय समुदाय की शैक्षिक चुनौतियों को प्रमुखता से सामने रखा। 24 अगस्त को जमशेदपुर, झारखंड में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने अपने शोध-पत्र का प्रस्तुतीकरण किया।
शोध निर्देशक डॉ. किरण नुरुटी के मार्गदर्शन में शोधरत नीलूराम कोर्राम ने नई शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में जनजातीय समुदाय की शैक्षिक चुनौतियों का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन विषय पर अपना शोध और अकादमिक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने जनजातीय समुदाय की शैक्षिक स्थिति, शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों तथा नई शिक्षा नीति-2020 के संभावित प्रभावों का सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया।
राष्ट्रीय मंच पर रखे जनजातीय शिक्षा से जुड़े सवाल
राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन अस्तित्व चैरिटेबल ट्रस्ट, चंडीगढ़ (पंजाब) एवं साहित्य श्री दरबार फाउंडेशन, रीवा (मध्य प्रदेश) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। संगोष्ठी का प्रमुख विषय नई शिक्षा नीति 2020: भारतीय शिक्षा में परिवर्तन, नवाचार एवं अनुसंधान की संभावनाएं रहा। संगोष्ठी के दौरान कोर्राम ने जनजातीय समुदाय की शैक्षिक स्थिति और उससे जुड़ी चुनौतियों पर शोधपरक विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने नई शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से जनजातीय समुदायों के लिए बनने वाली संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने इसके संभावित प्रभावों पर भी बात रखी।
उनके शोध-पत्र की प्रस्तुति और सक्रिय सहभागिता की आयोजकों ने सराहना की। उन्हें प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित भी किया गया। कोर्राम ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 नए अवसर प्रदान करती है। विशेष रूप से जनजातीय समुदायों की शैक्षिक चुनौतियों और संभावनाओं का सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टिकोण से अध्ययन वर्तमान समय में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी इस अकादमिक उपलब्धि पर बस्तर विश्वविद्यालय, बस्तर के समाजशास्त्र विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त किया।
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