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स्कूलों के करिकुलम में जोड़ा जाएगा फाइनेंशियल लिटरेसी और स्किल डेवलपमेंट कोर्स? एजुकेशन सिस्टम पर नीति आयोग का बड़ा सुझाव - niti aayog report reimagining skilling for viksit bharat

स्कूलों के करिकुलम में जोड़ा जाएगा फाइनेंशियल लिटरेसी और स्किल डेवलपमेंट कोर्स? एजुकेशन सिस्टम पर नीति आयोग का बड़ा सुझाव नीति आयोग की रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat @2047' ने भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम…

27 अगस्त 2026 को 02:37 am बजे
स्कूलों के करिकुलम में जोड़ा जाएगा फाइनेंशियल लिटरेसी और स्किल डेवलपमेंट कोर्स? एजुकेशन सिस्टम पर नीति आयोग का बड़ा सुझाव
 - niti aayog report reimagining skilling for viksit bharat

सौजन्य से:- Jagran

स्कूलों के करिकुलम में जोड़ा जाएगा फाइनेंशियल लिटरेसी और स्किल डेवलपमेंट कोर्स? एजुकेशन सिस्टम पर नीति आयोग का बड़ा सुझाव

नीति आयोग की रिपोर्ट 'Reimagining Skilling for Viksit Bharat @2047' ने भारत के स्किलिंग इकोसिस्टम में चुनौतियों को उजागर किया है। यह रिपोर्ट शिक्षा, स ...और पढ़ें

HighLights

- शिक्षा और रोजगार के बीच बड़ा अंतर।

- स्कूल स्तर से व्यावसायिक शिक्षा शुरू करने का सुझाव।

- अप्रेंटिसशिप और परिणाम-आधारित फंडिंग को बढ़ावा।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली | भारत ने पिछले एक दशक में दुनिया के सबसे बड़े स्किलिंग इकोसिस्टम में से एक तैयार किया है। साल 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को औपचारिक रूप से स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी है। वहीं, केंद्रीय बजट 2025-26 में विभिन्न मंत्रालयों के माध्यम से स्किलिंग से जुड़े कार्यक्रमों पर लगभग ₹34,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

इसके बावजूद नीति आयोग (NITI Aayog) की नई रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat @2047’ बताती है कि केवल ट्रेनिंग की संख्या बढ़ाने से रोजगार की समस्या हल नहीं हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के बीच मजबूत जुड़ाव की कमी अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पढ़ाई और नौकरी के बीच बड़ा अंतर

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में केवल 8.25% ग्रेजुएट ही अपनी पढ़ाई या योग्यता के अनुसार नौकरी कर रहे हैं। वहीं, ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी दर 13 प्रतिशत% है। महिलाओं की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है, जहां ग्रेजुएट महिलाओं में बेरोजगारी दर 20.4% तक पहुंच जाती है। तुलना करें तो देश की कुल बेरोजगारी दर करीब 3.2 प्रतिशत है।

सामान्य डिग्रियों की भरमार

देश के 3.4 करोड़ ग्रेजुएट छात्रों में से लगभग 1.13 करोड़ छात्र BA की पढ़ाई कर रहे हैं। BA, BSc और BCom पाठ्यक्रमों में कुल नामांकन 2 करोड़ से अधिक है। रिपोर्ट का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र ऐसी डिग्रियां ले रहे हैं जिनका इंडस्ट्रियों की वास्तविक जरूरतों से सीधा संबंध कम है।

सरकारी नौकरी के लिए तगड़ा कॉम्पटीशन

रोजगार और एजुकेशन के बीच असंतुलन का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच 55,000 सरकारी पदों के लिए 1.86 करोड़ आवेदन आए। यानी एक पद के लिए औसतन 338 उम्मीदवारों ने आवेदन किया।

मेधावी स्किल्स यूनिवर्सिटी के संस्थापक और कुलाधिपति प्रवेश दुदानी ने एक चैनल से बातचीत के दौरान बताया कि अब ध्यान केवल ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट की संख्या पर नहीं, बल्कि उसके परिणामों पर होना चाहिए।

उनके अनुसार, असली सवाल यह है कि ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं की जिंदगी में क्या बदलाव आया। क्या उन्हें रोजगार मिला, क्या वे बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और क्या उनके करियर में आगे बढ़ने के अवसर बने? उन्होंने कहा कि अप्रेंटिसशिप, वर्क-इंटीग्रेटेड डिग्री और रोजगार आधारित स्किलिंग को मुख्यधारा में लाना होगा।

स्कूल स्तर से शुरू हो व्यावसायिक शिक्षा

नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि देश के केवल 12 में से एक से भी कम माध्यमिक विद्यालय में व्यावसायिक (Vocational) विषय पढ़ाए जाते हैं। यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उस लक्ष्य से काफी पीछे है, जिसमें 2025 तक 50 प्रतिशत और 2030 तक सभी छात्रों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कक्षा 6 से 12 तक सभी छात्रों के लिए General Employability and Entrepreneurship Skills (GEES) लागू किए जाएं। इनमें कम्युनिकेशन स्किल, डिजिटल एजुकेशन, फाइनेंशियल लिटरेसी, टीमवर्क, प्राब्लम सॉल्विंग और उद्यमिता जैसे विषय शामिल होंगे।

रिपोर्ट में कक्षा 9 से ही संरचित व्यावसायिक शिक्षा (structured vocational tracks) ट्रैक शुरू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि छात्र ग्रेजुएट होने के बाद नहीं, बल्कि शुरुआती स्तर पर ही इंडस्ट्री की जरूरतों और रोजगार के अवसरों को समझ सकें।

अप्रेंटिसशिप को बढ़ावा

नीति आयोग ने अप्रेंटिसशिप व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की है। इसके लिए एक एकीकृत राज्य अप्रेंटिसशिप प्लेटफॉर्म बनाने का सुझाव दिया गया है, जो NAPS, NATS और राज्य स्तरीय योजनाओं को एक मंच पर लाएगा।

इस प्लेटफॉर्म पर छात्रों और कंपनियों को एक ही जगह पर अवसर, पात्रता, स्टाइपेंड और नौकरी संबंधी जानकारी मिल सकेगी। साथ ही MSME इकाइयों को अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों में शामिल करने के लिए विशेष प्रोत्साहन देने की भी सिफारिश की गई है।

ये भी पढ़ें: Sugar Crisis: देश में कितने दिन के लिए बचा है स्टॉक, विदेश से आने वाली चीनी कब तक पहुंचेगी भारत?

अब परिणाम के आधार पर मिले फंडिंग

रिपोर्ट का एक बड़ा सुझाव यह भी है कि स्किलिंग कार्यक्रमों की सफलता केवल इनरोलमेंट और कोर्स पूरा करने के आधार पर नहीं मापी जानी चाहिए। इसके बजाय फंडिंग को नौकरी मिलने, वेतन में बढ़ोतरी और लंबे समय तक रोजगार में बने रहने जैसे परिणामों से जोड़ा जाना चाहिए। इसके लिए स्किल वाउचर, प्लेसमेंट-लिंक्ड लोन और स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड जैसे मॉडल अपनाने की बात कही गई है।

डिजिटल स्किल्स पासपोर्ट का प्रस्ताव

रिपोर्ट में डिजिटल स्किल्स पासपोर्ट बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इसमें किसी व्यक्ति की योग्यता, स्किल, सर्टिफिकेट और काम के अनुभव का डिजिटल रिकॉर्ड होगा, जिसे एजुकेशन, ट्रेनिंग और एम्प्लोयमेंट के विभिन्न चरणों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

नीति आयोग का मानना है कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन यह जन सांख्यिकीय लाभ तभी वास्तविक आर्थिक शक्ति में बदलेगा, जब स्किलिंग को सीधे रोजगार इंडस्ट्री की मांग से जोड़ा जाए।

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