उत्तराखंड-5 हजार सरकारी स्कूलों में 10 से कम बच्चे: यशपाल आर्य ने शिक्षा नीति पर उठाए सवाल, 30 दिन में आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग - Udham Singh Nagar (Rudrapur) News
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सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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उत्तराखंड-5 हजार सरकारी स्कूलों में 10 से कम बच्चे:यशपाल आर्य ने शिक्षा नीति पर उठाए सवाल, 30 दिन में आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग
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उत्तराखंड में कम छात्र संख्या वाले सरकारी विद्यालयों को लेकर नेता प्रतिपक्ष और बाजपुर विधायक यशपाल आर्य ने सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब पांच हजार सरकारी प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ऐसे हैं, जहां छात्रों
आर्य के अनुसार, इनमें 4,275 प्राथमिक विद्यालय और करीब 650 जूनियर हाईस्कूल शामिल हैं। कुछ विद्यालयों में छात्रों की संख्या महज एक से चार तक रह गई है। उन्होंने कहा कि करीब 12 हजार करोड़ रुपये के वार्षिक शिक्षा बजट के बावजूद सरकारी स्कूलों में लगातार घटता नामांकन गंभीर चिंता का विषय है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह केवल छात्रों की कम संख्या का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी शिक्षा नीति, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी सुविधाओं से भी जुड़ा सवाल है। उन्होंने सरकार से इस स्थिति पर जवाब देने की मांग की।
सरकार से पूछे कई सवाल
यशपाल आर्य ने सवाल किया कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार क्यों घट रही है। उन्होंने यह भी जानकारी मांगी कि कितने विद्यालयों में स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों की कमी है और कितने स्कूल भवन, शौचालय, पेयजल, बिजली, प्रयोगशाला तथा डिजिटल सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
उन्होंने पूछा कि कितने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया गया है और इसका शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है।
30 दिन में आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग
आर्य ने सरकार से 30 दिनों के भीतर जिले और विद्यालयवार आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। इसमें प्रत्येक सरकारी विद्यालय की छात्र संख्या, 10 या उससे कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों की सूची, पिछले पांच वर्षों में बंद, विलय या मर्ज किए गए विद्यालयों का विवरण और प्रत्येक जिले में स्वीकृत एवं कार्यरत शिक्षकों की संख्या शामिल करने को कहा।
कम नामांकन पर स्कूल बंद करना समाधान नहीं
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कम नामांकन वाले विद्यालयों को सीधे बंद करना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने ऐसे स्कूलों के लिए विशेष पुनर्जीवन पैकेज तैयार करने की मांग की।
इसमें पर्याप्त और नियमित शिक्षकों की उपलब्धता के साथ जर्जर भवनों और बुनियादी सुविधाओं में समयबद्ध सुधार शामिल करने को कहा गया।
ग्रामसभा की राय लेने की मांग
आर्य ने मांग की कि किसी भी विद्यालय को बंद या विलय करने से पहले संबंधित ग्रामसभा, अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की राय लेने की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि गांव के सामाजिक अस्तित्व का भी महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
यशपाल आर्य ने कहा कि जनता के पैसे से चलने वाले विद्यालय जनता के बच्चों के लिए हैं। सरकार की जिम्मेदारी बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाने की है, न कि छात्र संख्या घटने के बाद विद्यालय बंद कर देना। उन्होंने कहा कि सरकार को आंकड़ों के साथ जवाब देना होगा और यदि शिक्षा नीति विफल हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
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