एजुकेशन हब इंदौर के स्कूलों में मात्र 41% बुनियादी सुविधाएं: शिक्षा मंत्रालय के सर्वे में देश के टॉप जिलों की रेस से बाहर हुआ एमपी - Bhopal News
- Hindi News - Local - Mp - Bhopal - MP Schools Out Of Top List | Indore Education Hub Report Card एजुकेशन हब इंदौर के स्कूलों में मात्र 41% बुनियादी सुविधाएं:शिक्षा मंत्रालय के सर्वे में देश के टॉप जिलों की रेस से बाहर…

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
- Hindi News
- Local
- Mp
- Bhopal
- MP Schools Out Of Top List | Indore Education Hub Report Card
एजुकेशन हब इंदौर के स्कूलों में मात्र 41% बुनियादी सुविधाएं:शिक्षा मंत्रालय के सर्वे में देश के टॉप जिलों की रेस से बाहर हुआ एमपी
- कॉपी लिंक
मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी राज्य और इंदौर को शिक्षा का सबसे बड़ा हब बताने वाले तमाम सरकारी दावों की हवा खुद केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट ने निकाल दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी जिला प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक (PGI-D) में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मिनी मुंबई और देश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्र इंदौर के स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सिर्फ 41 प्रतिशत हैं।
इस राष्ट्रीय सर्वे में देश के 784 जिलों की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को परखा गया, जिसमें मध्य प्रदेश का प्रदर्शन इस कदर निराशाजनक रहा कि सूचकांक के सर्वोच्च पायदानों पर राज्य का एक भी जिला अपनी जगह नहीं बना सका। शिक्षा मंत्रालय की इस रिपोर्ट के बाद अब प्रदेश की बदहाल स्कूली व्यवस्था और कागजी दावों के बीच का बड़ा अंतर सामने आ गया है।
देश के टॉप जिले: पंजाब-दिल्ली से कोसों दूर रह गया एमपी
जब हम देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों और जिलों पर नजर डालते हैं, तो मध्य प्रदेश की बदहाली और साफ हो जाती है। इस राष्ट्रीय सर्वे में पंजाब के बरनाला जिला 462 अंकों और श्री मुक्तसर साहिब जिला 447 अंकों के साथ देश में सबसे टॉप लीग यानी 'उत्तम-2' ग्रेड में बने हुए हैं।
इसके साथ ही केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ ने 437 अंकों के साथ देश में दूसरा सबसे सर्वश्रेष्ठ स्थान हासिल किया है। दिल्ली के भी अधिकांश जिले 420 से अधिक अंक लेकर शीर्ष पायदानों पर काबिज हैं।
दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश का सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाला सीधी जिला महज 333 अंक यानी सिर्फ 55.5 प्रतिशत ही हासिल कर सका है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि मध्य प्रदेश का सबसे बेस्ट जिला भी देश के टॉप जिलों से पूरे 100 अंक पीछे छूटकर इस रेस से पूरी तरह बाहर हो गया है।
वीआईपी और महानगरों का हाल: इंदौर-भोपाल भी फिसड्डी
राज्य के जिन महानगरों के दम पर विकास का ढिंढोरा पीटा जाता है, वहां की स्कूली हकीकत सबसे ज्यादा डराने वाली है। इंदौर जैसे महानगर में, जहां प्रदेश भर के बच्चे अपना भविष्य बनाने आते हैं, वहां के स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी सुविधाएं मात्र 41 प्रतिशत ही पाई गई हैं।
इतना ही नहीं, इंदौर में बच्चों की सीखने की क्षमता यानी लर्निंग आउटकम भी सिर्फ 47 प्रतिशत पर सिमट गया है। बात अगर देश के प्रशासनिक केंद्र और राज्य की राजधानी भोपाल की करें, तो यहां भी स्थिति दयनीय है। भोपाल के स्कूलों में लर्निंग आउटकम लगभग 47 प्रतिशत है, जबकि स्कूलों में मासूम बच्चों की सुरक्षा का पैमाना यानी स्कूल सेफ्टी का ग्राफ सिर्फ 37 प्रतिशत पर आकर ठहर गया है। यह स्थिति बताती है कि जब बड़े शहरों का यह हाल है, तो प्रदेश का पूरा सिस्टम किस कदर वेंटिलेटर पर है।
बड़वानी में डिजिटल लर्निंग 16 फीसदी पर
आधुनिक तकनीक और डिजिटल इंडिया के दौर में मध्य प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य जिलों की स्थिति और भी बदतर है। सागर जिले में डिजिटल लर्निंग का प्रदर्शन महज 24 प्रतिशत दर्ज किया गया है, जबकि धार जिले में यह और भी कम यानी सिर्फ 20 प्रतिशत ही रह गया है।
सबसे बुरी स्थिति आदिवासी बहुल बड़वानी जिले की सामने आई है, जहां डिजिटल लर्निंग का ग्राफ गिरकर मात्र 16 प्रतिशत पर आ गया है। बड़वानी में बच्चों के सीखने की क्षमता 36 प्रतिशत और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा केवल 26 प्रतिशत ही आंकी गई है। इसके अलावा विदिशा जिले में बच्चों की पढ़ाई का स्तर 41 प्रतिशत और अशोकनगर में स्कूल प्रबंधन 45 प्रतिशत दर्ज हुआ है। सरकारी डेटा के ये आंकड़े यह साबित करने के लिए काफी हैं कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के इस दौर में मध्य प्रदेश के बच्चे बुनियादी और डिजिटल शिक्षा के अधिकार से लगातार वंचित हो रहे हैं।
समझिए क्या है 'प्राचेष्टा' और इसमें कहां खड़ा है प्रदेश
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस सूचकांक में जिलों को उनकी परफॉर्मेंस के आधार पर अलग-अलग ग्रेड दिए हैं। इसमें 'उत्कर्ष' और 'उत्तम' को सबसे शीर्ष स्तर माना जाता है, जबकि 'प्राचेष्टा' को सुधार की ओर बढ़ते हुए मध्यम स्तर की श्रेणी में रखा गया है।
प्राचेष्टा का सीधा अर्थ है वह स्तर जहां स्कूल बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने की 'चेष्टा' यानी प्रयास तो कर रहे हैं, लेकिन गुणवत्ता के मानकों पर अभी बहुत पीछे हैं। इस रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के लिए सबसे शर्मनाक बात यह रही कि राज्य के अधिकांश जिले 'प्राचेष्टा-1', 'प्राचेष्टा-2' और 'प्राचेष्टा-3' के चक्रव्यूह में ही फंसकर रह गए हैं। पूरा प्रदेश साठ प्रतिशत के प्रदर्शन स्तर को भी पार नहीं कर पाया है, जिससे साफ है कि यहां के स्कूल अभी सिर्फ बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जीतू पटवारी बोले- यह 25 साल की सरकार का रिपोर्ट कार्ड है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यह रिपोर्ट आपकी सरकार की 25 वर्ष से अधिक की शिक्षा व्यवस्था का गंभीर रिपोर्ट कार्ड माना जाना चाहिए। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि अब विज्ञापनों और प्रचार की राजनीति से बाहर निकलकर स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर खुली बहस होनी चाहिए। पटवारी ने सीधे शब्दों में कहा कि मध्य प्रदेश के बच्चों का भविष्य कोई राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं है, आप सरकार चला रहे हैं इसलिए जवाब भी आपको ही देना होगा।
जेनरेशन-अल्फा के दौर में 16% डिजिटल पढ़ाई
मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन का उदाहरण देते हुए पत्र में बताया गया है कि वहां भी स्कूल सेफ्टी महज 34 प्रतिशत और डिजिटल लर्निंग सिर्फ 28 प्रतिशत पर टिकी है। जीतू पटवारी ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए लिखा कि आज 21वीं सदी में जब दुनिया 'जेनरेशन-अल्फा' की तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की बात कर रही है, तब हमारे कई जिलों में डिजिटल लर्निंग का स्तर 16, 20 और 24 प्रतिशत होना बेहद शर्मनाक है। यह अंतर सिर्फ सरकारी आंकड़ों का नहीं, बल्कि प्रदेश के बच्चों के सुनहरे भविष्य और सरकार के झूठे दावों के बीच की एक बहुत बड़ी खाई है।
Powered by शिक्षा खबर Skillogy
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
युवाओं को साधने में जुटा छात्र जदयू! मुंगेर में बोले प्रदेश अध्यक्ष धीरज पटेल- नीतीश सरकार में शिक्षा का हुआ कायाकल्प - nitish kumar vision bihar education reforms youth empowerment

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme; 20 lakh students to benefit

'मातृभाषा के साथ दूसरी भाषा भी जानें': महाराष्ट्र से अमित शाह ने क्या संदेश दिया? नई शिक्षा नीति पर भी बोले

PM श्री स्कूल: शिक्षा में खामियां, अधिकारी चिंतित

CCSU में बड़ा विवाद: कैंपस में प्रवेश से बैन हुए छात्रों ने VC की 'नो एंट्री' की उठाई मांग - ccsu vc banned students demand campus ban on vice chancellor sangeeta shukla

Over 13,000 schools being revamped under PM SHRI scheme, more than 20 lakh students to benefit

कॉलेजों में प्रवेश: 19 तक मौका लेकिन तीन दिन छुट्टी होने से दाखिले के लिए मिलेंगे महज 4 दिन - Bilaspur (Chhattisgarh) News

Are young Indian men starting to give up on college education?
ताज़ा ख़बरें
- नव-प्रवेशी छात्रों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की जानकारी दी - durg-bhilai News
- School education has lost its way - The Tribune
- IIT Delhi’s FITT Forward Puts Hands-On Learning, Industry-Ready Skills at Centre of Education Debate
- Industry vs Classroom: IIT Delhi summit concludes, industry leaders flag gaps in India’s engineering education
- India is expanding higher education, but what about safe student accommodation?
- 14 कॉलेजों में स्टेट, मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे पर प्रवेश: वेटरनरी में प्रवेश'; 1240 वेटरनरी सीटों के लिए 10 दिन का मौका - Bikaner News
- Lakhimpur Kheri News: पढ़ाई शुरू, लेकिन कॉलेजों में प्रवेश का सिलसिला अब भी जारी
- Beyond Scale: India’s Next Higher Education Challenge Is Building Distinctive Universities: Pramath Raj Sinha

